भारतीय रिजर्व बैंक इस हफ्ते फिर से रेपो रेट में कटौती कर सकता है और इस बार इसमें 0.50 फीसदी की कमी की संभावना जताई जा रही है। अभी रेपो रेट 6 फीसदी है जिसे घटाकर 5.50 फीसदी किया जा सकता है। यह निर्णय शुक्रवार को होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद लिया जाएगा। यह लगातार तीसरी बार होगा जब आरबीआई रेपो रेट को घटाएगा। फरवरी और अप्रैल में पहले ही 0.50-0.50 फीसदी की कटौती हो चुकी है, जिससे अब तक कुल एक फीसदी की राहत दी जा चुकी है और इस बार फिर इतनी ही या इससे कम कटौती की संभावना है।
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है और देश की आर्थिक स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। भारत में लगातार कमजोर होती वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू बाजार में उपभोग की सुस्ती के चलते मांग में स्थिरता लाने के लिए ब्याज दरों में राहत जरूरी मानी जा रही है। रेपो रेट में इस बार होने वाली कटौती से कर्ज सस्ता होगा, जिससे लोगों को होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य लोन पर ब्याज दर कम देनी पड़ेगी। इससे घर खरीदने, कारोबार शुरू करने और उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बैंकों ने अभी से अपने रेपो लिंक्ड ब्याज दरों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में 60.2 फीसदी कर्ज फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट यानी ईबीएलआर से जुड़े हैं और इनमें 35.9 फीसदी सीमांत लागत आधारित ब्याज दरों से जुड़े लोन शामिल हैं। अगर रेपो रेट में फिर से कटौती होती है तो इन सभी कर्जधारकों को सीधा फायदा मिलेगा।
बचत खातों पर मिलने वाले ब्याज पर भी इसका असर देखा जा सकता है। फरवरी में एफडी की ब्याज दरें घटकर 30 से 70 बेसिस प्वाइंट्स तक कम हो चुकी हैं। अब यदि जून में भी रेपो रेट घटाया जाता है तो यह कटौती और गहरी हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई बैंक पहले ही बचत खाते की ब्याज दर घटाकर 2.75 फीसदी तक कर चुके हैं और आगे चलकर इसमें और गिरावट हो सकती है।
बैंकिंग सेक्टर और उद्योग जगत की नजरें अब शुक्रवार को आरबीआई की घोषणा पर टिकी हैं। यह फैसला आम आदमी से लेकर कारोबारी वर्ग के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। अगर रेपो रेट घटता है तो आने वाले महीनों में होम लोन और अन्य लोन की ईएमआई कम हो सकती है जिससे उपभोक्ताओं को थोड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।